Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.284.35: उन्होंने अपने रोमछिद्रों से रोम्य नामक दो गणेश प्रकट किए, जो रुद्र के समान होने के कारण रुद्रगण कहलाए। उनका बल और पराक्रम भी रुद्र के समान था।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.284.35 
सोऽसृजद् रोमकूपेभ्यो रौम्यान् नाम गणेश्वरान्।
रुद्रतुल्या गणा रौद्रा रुद्रवीर्यपराक्रमा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने रोमछिद्रों से रोम्य नामक दो गणेश प्रकट किए, जो रुद्र के समान होने के कारण रुद्रगण कहलाए। उनका बल और पराक्रम भी रुद्र के समान था।
 
From his pores he manifested two Ganeshas named Romya, who were called Rudragan because they were similar to Rudra. Their strength and valour were also similar to that of Rudra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)