Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.22: दक्ष ने कहा - महर्षे! देखिए, यह समस्त हवि मंत्रों से शुद्ध करके एक स्वर्ण पात्र में रखी है। यह यज्ञेश्वर श्री विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु की कहीं कोई बराबरी नहीं है। मैं हविष्य का यह भाग उन्हीं को अर्पित करूँगा। ये भगवान विष्णु सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी और यज्ञ करने में समर्थ हैं। 22॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दक्ष ने कहा - महर्षे! देखिए, यह समस्त हवि मंत्रों से शुद्ध करके एक स्वर्ण पात्र में रखी है। यह यज्ञेश्वर श्री विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु की कहीं कोई बराबरी नहीं है। मैं हविष्य का यह भाग उन्हीं को अर्पित करूँगा। ये भगवान विष्णु सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी और यज्ञ करने में समर्थ हैं। 22॥
Dakshna said – Maharshe! Look, all this offering, ritually purified with mantras, is kept in a golden vessel. This Yajneshwar is dedicated to Shri Vishnu. Lord Vishnu has no equal anywhere. I will offer this part of the future to him only. This Lord Vishnu is all-powerful, all-embracing and capable of offering the yagya. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥