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श्लोक 12.284.197  |
न राक्षसा: पिशाचा वा न भूता न विनायका:।
विघ्नं कुर्युर्गृहे तस्य यत्रायं पठॺते स्तव:॥ १९७॥ |
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| अनुवाद |
| जिस घर में यह स्तोत्र पढ़ा जाता है, वहाँ राक्षस, भूत और विनायक कभी उपद्रव नहीं करते ॥197॥ |
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| In the house where this hymn is recited, demons, ghosts and Vinayaka never cause any disturbance. ॥ 197॥ |
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