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श्लोक 12.284.18  |
अनृतं नोक्तपूर्वं मे न च वक्ष्ये कदाचन।
देवतानामृषीणां च मध्ये सत्यं ब्रवीम्यहम्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| ‘मैंने पहले कभी झूठ नहीं बोला और आगे भी कभी झूठ नहीं बोलूँगा। मैं इन देवताओं और ऋषियों के सामने सच बोल रहा हूँ।’॥18॥ |
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| ‘I have never lied before and I will never lie again. I am speaking the truth in front of these gods and sages.'॥ 18॥ |
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