श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.284.18 
अनृतं नोक्तपूर्वं मे न च वक्ष्ये कदाचन।
देवतानामृषीणां च मध्ये सत्यं ब्रवीम्यहम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘मैंने पहले कभी झूठ नहीं बोला और आगे भी कभी झूठ नहीं बोलूँगा। मैं इन देवताओं और ऋषियों के सामने सच बोल रहा हूँ।’॥18॥
 
‘I have never lied before and I will never lie again. I am speaking the truth in front of these gods and sages.'॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd