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mahabharat 12.284.179: हे प्रभु! मैं आपकी सूक्ष्म माया से मोहित हो गया था, इसीलिए मैंने आपको आमंत्रित नहीं किया॥179॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  12.284.179 
अथवा मायया देव सूूक्ष्मया तव मोहित:।
एतस्मात् कारणाद् वापि तेन त्वं न निमन्त्रित:॥ १७९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं आपकी सूक्ष्म माया से मोहित हो गया था, इसीलिए मैंने आपको आमंत्रित नहीं किया॥179॥
 
O lord! I was enchanted by your subtle illusion; that is also the reason why I did not invite you.॥ 179॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)