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mahabharat 12.284.142: आप अक्षप्रिय, धूर्त, गणाध्यक्ष और गणाधिप आदि नामों से प्रसिद्ध हैं। आप लाल वस्त्र और लाल पुष्पों की माला धारण करते हैं, पर्वत पर शयन करते हैं और भगवा वस्त्र प्रिय हैं ॥142॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  12.284.142 
सदा चाक्षप्रियो धूर्तो गणाध्यक्षो गणाधिप:।
रक्तमाल्याम्बरधरो गिरिशो गिरिकप्रिय:॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
आप अक्षप्रिय, धूर्त, गणाध्यक्ष और गणाधिप आदि नामों से प्रसिद्ध हैं। आप लाल वस्त्र और लाल पुष्पों की माला धारण करते हैं, पर्वत पर शयन करते हैं और भगवा वस्त्र प्रिय हैं ॥142॥
 
You are famous by the names like Akshapriya, Dhurta, Ganaadhyaksh and Ganaadhipa. You wear red clothes and garland of red flowers, sleep on the mountain and love saffron clothes. ॥ 142॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)