Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.14-16h: ऐसा कहकर महायोगी दधीचि ने ध्यानपूर्वक देखा तो उन्हें भगवान शंकर और शुभ एवं वरदायिनी देवी पार्वती दिखाई दीं। उनके निकट ही महात्मा नारदजी भी दिखाई दिए, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न हुए। योगी दधीचि को विश्वास हो गया कि ये सभी देवता एकमत हो गए हैं। इसीलिए उन्होंने महेश्वर को यहाँ आमंत्रित नहीं किया है। | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्त्वा स महायोगी पश्यति ध्यानचक्षुषा।
स पश्यति महादेवं देवीं च वरदां शुभाम्॥ १४॥
नारदं च महात्मानं तस्या देव्या: समीपत:।
संतोषं परमं लेभे इति निश्चित्य योगवित् ॥ १५॥
एकमन्त्रास्तु ते सर्वे येनेशो न निमन्त्रित:।
अनुवाद
ऐसा कहकर महायोगी दधीचि ने ध्यानपूर्वक देखा तो उन्हें भगवान शंकर और शुभ एवं वरदायिनी देवी पार्वती दिखाई दीं। उनके निकट ही महात्मा नारदजी भी दिखाई दिए, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न हुए। योगी दधीचि को विश्वास हो गया कि ये सभी देवता एकमत हो गए हैं। इसीलिए उन्होंने महेश्वर को यहाँ आमंत्रित नहीं किया है।
Saying this, when the great yogi Dadhichi looked carefully, he saw Lord Shankar and the auspicious and boon-giving Goddess Parvati. Mahatma Naradji was also seen near them, which made him very happy. The yogi Dadhichi was sure that all these gods have agreed to a consensus. That is why they have not invited Maheshwar here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥