श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  12.284.132 
त्वमिन्द्रश्च यमश्चैव वरुणो धनदोऽनल:।
उपप्लवश्चित्रभानु: स्वर्भानुर्भानुरेव च॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
आप इंद्र, यम, वरुण, कुबेर, अग्नि, सूर्य और चंद्रमा के ग्रहणकर्ता, चित्रभानु (सूर्य), राहु और भानु हैं। 132.
 
You are Indra, Yama, Varuna, Kubera, Agni, eclipse of the Sun and Moon, Chitrabhanu (Sun), Rahu and Bhanu. 132.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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