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mahabharat 12.284.125: आप समुद्रों में क्षीरसागर हैं, शस्त्रों में धनुष हैं, चलाए जाने वाले शस्त्रों में वज्र हैं और व्रतों में सत्य हैं ॥125॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  12.284.125 
क्षीरोदो ह्युदधीनां च यन्त्राणां धनुरेव च।
वज्र: प्रहरणानां च व्रतानां सत्यमेव च॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
आप समुद्रों में क्षीरसागर हैं, शस्त्रों में धनुष हैं, चलाए जाने वाले शस्त्रों में वज्र हैं और व्रतों में सत्य हैं ॥125॥
 
You are the Kshirsagar (the milky ocean) among the oceans, the bow among the weapons, the thunderbolt among the weapons that can be used and the truth among the vows. ॥125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)