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mahabharat 12.284.123: आप ही वर्ष, ऋतु, मास, पक्ष, आयु, क्षण, नक्षत्र, ग्रह और कलाएँ हैं ॥123॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  12.284.123 
संवत्सरस्त्वमृतवो मासो मासार्धमेव च।
युगं निमेषा: काष्ठास्त्वं नक्षत्राणि ग्रहा: कला:॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
आप ही वर्ष, ऋतु, मास, पक्ष, आयु, क्षण, नक्षत्र, ग्रह और कलाएँ हैं ॥123॥
 
You are the year, the season, the month, the fortnight, the age, the moment, the constellation, the planets and the phases. ॥123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)