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mahabharat 12.284.120: हे देवश्रेष्ठ! वेदवेत्ता पुरुष साम स्तोत्रों का गान करते हुए बार-बार 'हा यी, हा यी, हुआ वा, हा यी, हा वु, हा यी' आदि का जप करते हैं और निरन्तर आपकी महिमा का गान करते हैं॥ 120॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  12.284.120 
हायिहायिहुवाहायिहावुहायि तथाऽसकृत्।
गायन्ति त्वां सुरश्रेष्ठ सामगा ब्रह्मवादिन:॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
हे देवश्रेष्ठ! वेदवेत्ता पुरुष साम स्तोत्रों का गान करते हुए बार-बार 'हा यी, हा यी, हुआ वा, हा यी, हा वु, हा यी' आदि का जप करते हैं और निरन्तर आपकी महिमा का गान करते हैं॥ 120॥
 
O best of the gods! The men versed in the Vedas who sing Sama hymns, repeatedly chant 'Haa Yi, Haa Yi, Hua Vaa, Haa Yi, Haa Wu, Haa Yi' etc., and continuously sing your glories.॥ 120॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)