श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  12.284.119 
मनस: परमा योनि: खं वायुर्ज्योतिषां निधि:।
ऋक्सामानि तथोङ्कारमाहुस्त्वां ब्रह्मवादिन:॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
वैदिक विद्वान् आपको मन, आकाश, वायु, तेज, ऋक्, साम और ओंकार का परम कारण कहते हैं ॥119॥
 
Vedic scholars call you the ultimate cause of mind, sky, air, source of brilliance, rik, sama and omkar. 119॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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