Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.109: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने में आपकी कीर्ति वर्णन करने योग्य है। आप साँख्य के स्वरूप, साँख्य योगियों में प्रमुख और साँख्यशास्त्र के प्रचारक हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥109॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने में आपकी कीर्ति वर्णन करने योग्य है। आप साँख्य के स्वरूप, साँख्य योगियों में प्रमुख और साँख्यशास्त्र के प्रचारक हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥109॥
Your fame in the matter of giving Dharma, Artha, Kama and Moksha is worth describing. You are the embodiment of Sankhya, the chief among Sankhya Yogis and the one who propagated Sankhya Shastra. I salute you.॥109॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥