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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  12.284.10-11h 
आहूता मन्त्रिता: सर्वे देवाश्च सह पत्निभि:॥ १०॥
विराजन्ते विमानस्था दीप्यमाना इवाग्नय:।
 
 
अनुवाद
सभी देवता, जिन्हें आमंत्रित किया गया था, अपनी पत्नियों के साथ विमानों पर बैठकर आते समय प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे।
 
All the gods who had been invited, were shining like blazing fire while arriving along with their wives, seated in their planes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)