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mahabharat 12.283.62: बेटा! इस प्रकार वृत्रासुर के वध के प्रसंग में मैंने महान महेश्वर ज्वर की उत्पत्ति का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। अब मैं तुम्हें और क्या बताऊँ?॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  12.283.62 
इत्येष वृत्रमाश्रित्य ज्वरस्य महतो मया।
विस्तर: कथित: पुत्र किमन्यत् प्रब्रवीमि ते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
बेटा! इस प्रकार वृत्रासुर के वध के प्रसंग में मैंने महान महेश्वर ज्वर की उत्पत्ति का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। अब मैं तुम्हें और क्या बताऊँ?॥ 62॥
 
Son! In this way, in the context of the killing of Vritraasura, I have narrated in detail the origin of the great Maheshwar fever. What more should I tell you now?॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)