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श्लोक  12.283.50 
परां च प्रीतिमगमदुत्स्मयंश्च पिनाकधृक्।
अवाप च तदा भागं यथोक्तं ब्रह्मणा भव:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
पिनाकधारी शिव उस समय बहुत प्रसन्न हुए और मुस्कुराने लगे। ब्रह्माजी के निर्देशानुसार उन्हें यज्ञ में अपना भाग मिल गया।
 
Pinakadhari Shiva was very happy at that time and he started smiling. As per Brahmaji's instructions, he got his share in the yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)