Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.283.5-6h: भरतनंदन! महाराज! प्राचीन काल में सुमेरु पर्वत पर ज्योतिष्क नाम से एक प्रसिद्ध शिखर था, जो सविता (सूर्य) देवता से संबंधित होने के कारण सवित्र कहलाता था। वह सब प्रकार के रत्नों से सुशोभित, अतुलनीय, समस्त लोकों से अगम्य तथा तीनों लोकों द्वारा पूजित था। | mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा मेरोर्महाराज शृङ्गं त्रैलोक्यपूजितम्।
ज्योतिष्कं नाम सावित्रं सर्वरत्नविभूषितम्॥ ५॥
अप्रमेयमनाधृष्यं सर्वलोकेषु भारत।
अनुवाद
भरतनंदन! महाराज! प्राचीन काल में सुमेरु पर्वत पर ज्योतिष्क नाम से एक प्रसिद्ध शिखर था, जो सविता (सूर्य) देवता से संबंधित होने के कारण सवित्र कहलाता था। वह सब प्रकार के रत्नों से सुशोभित, अतुलनीय, समस्त लोकों से अगम्य तथा तीनों लोकों द्वारा पूजित था।
Bharatnandan! Maharaj! In ancient times, there was a famous peak of Sumeru mountain named Jyotishka, which was called Savitra because of its connection with Savita (Sun) deity. He was adorned with all types of gems, incomparable, inaccessible to all the worlds and worshiped by all the three worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥