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mahabharat 12.283.49: जब ब्रह्माजी ने ऐसा कहा और यज्ञ में भाग लेने की व्यवस्था हो गई, तब महादेवजी सर्वशक्तिमान ब्रह्माजी से इस प्रकार बोले- ‘तथास्तु’ ऐसा ही हो।   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.283.49 
इत्युक्तो ब्रह्मणा देवो भागे चापि प्रकल्पिते।
भगवन्तं तथेत्याह ब्रह्माणममितौजसम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जब ब्रह्माजी ने ऐसा कहा और यज्ञ में भाग लेने की व्यवस्था हो गई, तब महादेवजी सर्वशक्तिमान ब्रह्माजी से इस प्रकार बोले- ‘तथास्तु’ ऐसा ही हो।
 
When Lord Brahma said this and arrangements were made to take part in the yagya, then Mahadevji spoke to the almighty Lord Brahma in this way - 'Tathaastu' may it be like this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)