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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.283.47 
यश्चैष पुरुषो जात: स्वेदात् ते विबुधोत्तम।
ज्वरो नामैष धर्मज्ञ लोकेषु प्रचरिष्यति॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता देवेश्वर! आपके पसीने से प्रकट हुआ यह पुरुष ज्वर कहलाएगा। यह समस्त लोकों में विचरण करेगा।
 
O knower of Dharma, Deveshwar! This person who has appeared from your sweat will be called fever. He will roam in all the worlds. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)