Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.283.40-41: उसके बाल ऊपर की ओर उठे हुए थे। उसके सभी अंग चील या उल्लू के समान बालों से ढके हुए थे। उसका शरीर काला और भयानक था। उसके वस्त्र लाल रंग के थे। उस महाशक्तिशाली पुरुष ने उस यज्ञ को उसी प्रकार जला दिया जैसे अग्नि सूखी लकड़ी या घास के ढेर को जलाकर राख कर देती है। | mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके बाल ऊपर की ओर उठे हुए थे। उसके सभी अंग चील या उल्लू के समान बालों से ढके हुए थे। उसका शरीर काला और भयानक था। उसके वस्त्र लाल रंग के थे। उस महाशक्तिशाली पुरुष ने उस यज्ञ को उसी प्रकार जला दिया जैसे अग्नि सूखी लकड़ी या घास के ढेर को जलाकर राख कर देती है।
His hair was raised upwards. All his limbs were covered with hair like that of an eagle or an owl. His body was black in colour and hideous. His clothes were red in colour. That great powerful man burnt that sacrifice in the same manner as fire burns dry wood or a heap of hay to ashes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥