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mahabharat 12.283.37-39h: तत्पश्चात्, नित्य तेजस्वी देवेश्वर महादेवजी के क्रोध के कारण उनके ललाट से पसीने की एक बूंद प्रकट हुई। उस पसीने की बूंद के पृथ्वी पर गिरते ही काली अग्नि के समान एक विशाल अग्निपुंज प्रकट हुआ।   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 37-39h
 
 
श्लोक  12.283.37-39h 
ततस्तस्य सुरेशस्य क्रोधादमिततेजस:॥ ३७॥
ललाटात् प्रसृतो घोर: स्वेदबिन्दुर्बभूव ह।
तस्मिन् पतितमात्रे च स्वेदबिन्दौ तदा भुवि॥ ३८॥
प्रादुर्बभूव सुमहानग्नि: कालानलोपम:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, नित्य तेजस्वी देवेश्वर महादेवजी के क्रोध के कारण उनके ललाट से पसीने की एक बूंद प्रकट हुई। उस पसीने की बूंद के पृथ्वी पर गिरते ही काली अग्नि के समान एक विशाल अग्निपुंज प्रकट हुआ।
 
Thereafter, due to the anger of the ever-fabulous Deveshwar Mahadevji, a drop of sweat appeared from his forehead. As soon as that drop of sweat fell on the earth, a huge mass of fire like black fire emerged.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)