Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.283.13: तप के धनी भारत सिद्ध और विद्याधर वहाँ पशुपति महादेवजी की पूजा करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.283.13 
तथा विद्याधराश्चैव सिद्धाश्चैव तपोधना:।
महादेवं पशुपतिं पर्युपासन्त भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तप के धनी भारत सिद्ध और विद्याधर वहाँ पशुपति महादेवजी की पूजा करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
 
India Siddha and Vidyadhar, who were rich in penance, were always ready to worship Pashupati Mahadevji there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)