ब्रह्मोवाच
अल्पा इति मतिं कृत्वा यो नरो बुद्धिमोहित:।
श्लेष्ममूत्रपुरीषाणि युष्मासु प्रतिमोक्ष्यति॥ ५४॥
तमियं यास्यति क्षिप्रं तत्रैव च निवत्स्यति।
तथा वो भविता मोक्ष इति सत्यं ब्रवीमि व:॥ ५५॥
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले- यदि कोई मनुष्य अपनी बुद्धि की मंदता से मोहित होकर जल का तिरस्कार करता है तथा तुम पर थूकता, खांसता या मलत्याग करता है, तो यह ब्रह्महत्या तुम्हें छोड़कर उसी के पास चली जाएगी और उसी में निवास करेगी। इस प्रकार तुम ब्रह्महत्या से बच जाओगे, यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। 54-55।
Brahmaji said- If any person, deluded by the dullness of his intellect, treats water with contempt and spits, coughs or excrements in you, this killing of a brahmin will leave you and go to him and reside in him. In this way you will be saved from killing a brahmin, I am telling you the truth. 54-55.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥