श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.282.48 
ततस्त्रिलोककृद् देव: पुनरेव महातपा:।
अप:संचिन्तयामास ध्यातास्ताश्चाप्यथागमन्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तब तीनों लोकों की रचना करने वाले महातपस्वी भगवान ब्रह्मा को पुनः जल का विचार आया। विचार करते ही जलदेवता तुरन्त वहाँ प्रकट हो गए ॥48॥
 
Then the great ascetic Lord Brahma, who created the three worlds, again thought of water. As soon as he thought of it, the water god immediately appeared there. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)