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श्लोक  12.281.36 
अनेन हि तपस्तप्तं बलार्थममराधिप।
षष्टिं वर्षसहस्राणि ब्रह्मा चास्मै वरं ददौ॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
अमरेश्वर! इस वृत्रासुर ने केवल बल प्राप्त करने के लिए साठ हजार वर्षों तक तपस्या की थी और तब भगवान ब्रह्मा ने उसे इच्छित वर प्रदान किया था॥36॥
 
Amareshwar! This Vritrasura had performed penance for sixty thousand years only to acquire strength and then Lord Brahma had granted him the desired boon. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)