Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.281.32-33: तत्पश्चात् बुद्धिमान बृहस्पति, महामुनि वशिष्ठ तथा सम्पूर्ण महर्षि वरदाता तथा शतक्रतु इन्द्र के पास जाकर लोगों द्वारा पूजित तथा मन में एकाग्र होकर बोले - 'प्रभो! वृत्रासुर का वध करो ॥32-33॥ | mahabharat अध्याय 12.281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो बृहस्पतिर्धीमानुपागम्य शतक्रतुम्।
वसिष्ठश्च महातेजा: सर्वे च परमर्षय:॥ ३२॥
ते समासाद्य वरदं वासवं लोकपूजितम्।
ऊचुरेकाग्रमनसो जहि वृत्रमिति प्रभो॥ ३३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् बुद्धिमान बृहस्पति, महामुनि वशिष्ठ तथा सम्पूर्ण महर्षि वरदाता तथा शतक्रतु इन्द्र के पास जाकर लोगों द्वारा पूजित तथा मन में एकाग्र होकर बोले - 'प्रभो! वृत्रासुर का वध करो ॥32-33॥
After that, the intelligent Brihaspati, the great sage Vashishtha and the complete Maharishi went to the boon giver and Shatkratu Indra, worshiped by the people and concentrated in their minds and said - 'Lord! Kill Vritrasura. 32-33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥