श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.280.33 
षड् जीववर्णा: परमं प्रमाणं
कृष्णो धूम्रो नीलमथास्य मध्यम्।
रक्तं पुन: सह्यतरं सुखं तु
हारिद्रवर्णं सुसुखं च शुक्लम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जीवों के छह प्रकार के रंग हैं - कृष्ण, धूम्र, नील, रक्त, हरिद्रा (पीला) और श्वेत*। इनमें कृष्ण, धूम्र और नील का सुख मध्यम है। रक्त वर्ण विशेष रूप से सहनीय है। हरिद्रा के समान चमक सुख देने वाली है और श्वेत वर्ण अत्यंत सुखदायक है। 33॥
 
'There are six types of colors of living beings - Krishna, smoke, blue, blood, haridra (yellow) and white*. Of these, the happiness of Krishna, Smoke and Blue is medium. Blood color is especially tolerable. The glow like Haridra gives happiness and the white color is very soothing. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)