Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.28.59: हे इन्द्र के समान पराक्रमी और अपने धर्म से कभी विचलित न होने वाले कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर, तुम भी शोक त्यागकर उठो और हृदय में प्रसन्न रहो। तुमने क्षत्रिय धर्म के अनुसार इस पृथ्वी को जीता है; अतः इसका उपभोग करो। इसकी उपेक्षा मत करो। ॥59॥ | mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा त्वमप्यच्युत मुञ्च शोक-
मुत्तिष्ठ शक्रोपम हर्षमेहि।
क्षात्रेण धर्मेण मही जिता ते
तां भुङ्क्ष्व कुन्तीसुत मावमंस्था:॥ ५९॥
अनुवाद
हे इन्द्र के समान पराक्रमी और अपने धर्म से कभी विचलित न होने वाले कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर, तुम भी शोक त्यागकर उठो और हृदय में प्रसन्न रहो। तुमने क्षत्रिय धर्म के अनुसार इस पृथ्वी को जीता है; अतः इसका उपभोग करो। इसकी उपेक्षा मत करो। ॥59॥
O Yudhishthira, son of Kunti, who is as valiant as Indra and never deviates from his Dharma, you should also leave your grief and rise and be happy in your heart. You have conquered this earth according to the Kshatriya Dharma; therefore, enjoy it. Do not neglect it. ॥ 59॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि व्यासवाक्येऽष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें व्यासवाक्यविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥