श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  12.28.53 
क्व नु तेऽद्य पिता राजन् क्व नु तेऽद्य पितामहा:।
न त्वं पश्यसि तानद्य न त्वां पश्यन्ति तेऽनघ॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
राजा! आज तुम्हारे पिता कहाँ हैं? तुम्हारे दादाजी आज कहाँ चले गए? हे निष्पाप राजा! आज न तो तुम उन्हें देख रहे हो और न ही वे तुम्हें देख रहे हैं॥ 53॥
 
King! Where is your father today? Where has your grandfather gone today? Sinless king! Today neither are you seeing him nor is he seeing you. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)