vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना
»
श्लोक 53
श्लोक
12.28.53
क्व नु तेऽद्य पिता राजन् क्व नु तेऽद्य पितामहा:।
न त्वं पश्यसि तानद्य न त्वां पश्यन्ति तेऽनघ॥ ५३॥
अनुवाद
राजा! आज तुम्हारे पिता कहाँ हैं? तुम्हारे दादाजी आज कहाँ चले गए? हे निष्पाप राजा! आज न तो तुम उन्हें देख रहे हो और न ही वे तुम्हें देख रहे हैं॥ 53॥
King! Where is your father today? Where has your grandfather gone today? Sinless king! Today neither are you seeing him nor is he seeing you. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×