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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना
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श्लोक 35
श्लोक
12.28.35
नौषधानि न मन्त्राश्च न होमा न पुनर्जपा:।
त्रायन्ते मृत्युनोपेतं जरया चापि मानवम्॥ ३५॥
अनुवाद
यहां तक कि औषधि, मंत्र, होम और जप भी उस व्यक्ति को नहीं बचा सकते जो बुढ़ापे और मृत्यु की चपेट में है।
Even medicine, mantra, homa and japa cannot save a man who is in the grip of old age and death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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