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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.28.3 
अश्मानं ब्राह्मणं प्राज्ञं वैदेहो जनको नृप:।
संशयं परिपप्रच्छ दु:खशोकसमन्वित:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, विदेह के राजा जनक ने दुःख और शोक में डूबे हुए विद्वान ब्राह्मण अश्मा से इस प्रकार अपना संदेह पूछा।
 
Once upon a time, King Janaka of Videha, who was drowned in sorrow and grief, asked the learned Brahmin Ashma about his doubts in this manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)