श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.28.25-26h 
व्याधिरग्निर्जलं शस्त्रं बुभुक्षाश्चापदो विषम्।
ज्वरश्च मरणं जन्तोरुच्चाच्च पतनं तथा॥ २५॥
निर्माणे यस्य यद् दिष्टं तेन गच्छति सेतुना।
 
 
अनुवाद
रोग, अग्नि, जल, शस्त्र, भूख, प्यास, विपत्ति, विष, ज्वर और ऊँचे स्थान से गिरना - ये सब जीव की मृत्यु के कारण हैं। जन्म के समय मनुष्य के लिए जो कारण निर्धारित होता है, वही उसका सेतु है, अतः वह उसी से होकर जाता है, अर्थात् परलोक जाता है।॥25 1/2॥
 
Disease, fire, water, weapons, hunger, thirst, adversity, poison, fever and falling from a high place - all these are the causes of death of a living being. The cause determined for a person at the time of birth is his bridge, hence he goes through it, i.e. he goes to the other world.॥ 25 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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