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mahabharat 12.28.13: इस प्रकार इन दो कारणों से मनुष्य को ये नाना प्रकार के दुःख प्राप्त होते हैं। ये दुःख विषयों में आसक्ति से भी उत्पन्न होते हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.28.13 
एवमेतानि दु:खानि तानि तानीह मानवम्।
विविधान्युपवर्तन्ते तथा संस्पर्शजान्यपि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार इन दो कारणों से मनुष्य को ये नाना प्रकार के दुःख प्राप्त होते हैं। ये दुःख विषयों में आसक्ति से भी उत्पन्न होते हैं ॥13॥
 
Thus, due to these two reasons, man receives these different types of sorrows. These sorrows also arise from attachment to objects. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)