Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.28.10: महाराज! जो मनुष्य बीस या तीस वर्ष की आयु में चोरी आदि बुरे कर्मों में लिप्त रहते हैं, वे सौ वर्ष तक जीवित नहीं रहते।   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.28.10 
ये च विंशतिवर्षा वा त्रिंशद्वर्षाश्च मानवा:।
परेण ते वर्षशतान्न भविष्यन्ति पार्थिव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो मनुष्य बीस या तीस वर्ष की आयु में चोरी आदि बुरे कर्मों में लिप्त रहते हैं, वे सौ वर्ष तक जीवित नहीं रहते।
 
King! Those men of the age of twenty or thirty who indulge in evil deeds like theft etc., do not live till hundred years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)