श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.279.6 
भीष्म उवाच
नास्त्यनन्तं महाराज सर्वं संख्यानगोचर:।
पुनर्भावोऽपि विख्यातो नास्ति किंचिदिहाचलम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "महाराज! दुःख अनंत नहीं है। संसार में सभी वस्तुएँ सीमित संख्या में हैं, असंख्य नहीं हैं। पुनर्जन्म भी अपनी नश्वरता के लिए जाना जाता है। तात्पर्य यह है कि इस संसार में कोई भी वस्तु अचल या स्थायी नहीं है ॥6॥
 
Bhishma said, "Maharaj, suffering is not infinite. All things in the world are limited in number, not innumerable. Rebirth is also known for its mortality. The meaning is that nothing in this world is immovable or permanent. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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