श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.279.33 
केन वा कर्मणा शक्यमथ ज्ञानेन केन वा।
तदवाप्तुं फलं विप्र तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! वह फल किस कर्म या ज्ञान से प्राप्त होता है? कृपा करके मुझे यह बताइए॥33॥
 
Brahmin! By which action or knowledge can that fruit be achieved? Kindly tell me this. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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