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mahabharat 12.279.32: जीव किस कारण से जीवन धारण करते हैं ? और किस कारण से कर्मों में प्रवृत्त होते हैं ? किस परम फल को प्राप्त करके जीव अमर और सनातन हो जाता है ? 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.279.32 
कस्माद् भूतानि जीवन्ति प्रवर्तन्ते तथा पुन:।
किं वा फलं परं प्राप्य जीवस्तिष्ठति शाश्वत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जीव किस कारण से जीवन धारण करते हैं ? और किस कारण से कर्मों में प्रवृत्त होते हैं ? किस परम फल को प्राप्त करके जीव अमर और सनातन हो जाता है ? 32॥
 
For what reason do creatures take life? And for what reason do we get engaged in actions? By attaining what supreme fruit does the living being become immortal and eternal? 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)