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श्लोक 12.279.32  |
कस्माद् भूतानि जीवन्ति प्रवर्तन्ते तथा पुन:।
किं वा फलं परं प्राप्य जीवस्तिष्ठति शाश्वत:॥ ३२॥ |
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| अनुवाद |
| जीव किस कारण से जीवन धारण करते हैं ? और किस कारण से कर्मों में प्रवृत्त होते हैं ? किस परम फल को प्राप्त करके जीव अमर और सनातन हो जाता है ? 32॥ |
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| For what reason do creatures take life? And for what reason do we get engaged in actions? By attaining what supreme fruit does the living being become immortal and eternal? 32॥ |
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