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श्लोक 12.279.30  |
नूनं तु तस्य तपस: सावशेषमिहास्ति वै।
यदहं प्रष्टुमिच्छामि भगवन् कर्मण: फलम्॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रभु! निश्चय ही मेरे तप का कुछ अंश अभी भी शेष है, अतः मैं उस कर्म का फल जानना चाहता हूँ ॥30॥ |
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| O Lord! Surely some part of my penance still remains, so I wish to inquire about the result of that action. ॥ 30॥ |
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