श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.279.3 
कदा वयं करिष्याम: संन्यासं दु:खसंज्ञकम्।
दु:खमेतच्छरीराणां धारणं कुरुसत्तम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! हम उस त्याग को कब धारण करेंगे जिसे संसारी लोग दुःख कहते हैं? हमें तो यह शरीर धारण करना ही दुःख प्रतीत होता है॥3॥
 
O best of the Kurus! When will we adopt that renunciation which is called sorrow by the worldly men? To us the very act of wearing these bodies seems to be sorrow.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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