श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.279.2 
लोकसम्भावितैर्दु:खं यत् प्राप्तं कुरुसत्तम।
प्राप्य जातिं मनुष्येषु देवैरपि पितामह॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे कौरवों के पितामह! देवताओं से मनुष्य लोक में उत्पन्न होकर और सबके द्वारा सम्मानित होकर भी हम लोगों को यहाँ महान दुःख प्राप्त हुआ है॥2॥
 
O great grandfather of Kurus! In spite of being born in the human world from the gods and being honoured by everyone, we have suffered great sorrow here. ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)