श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.279.19 
तिर्यग्योनिसहस्राणि गत्वा नरकमेव च।
निर्गच्छन्त्यवशा जीवा: कामबन्धनबन्धना:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
कामनाओं के बंधनों से बँधे हुए बहुत से प्राणी हजारों बार पशुलोक और नरक में गिरते हैं और फिर वहाँ से निकल आते हैं॥19॥
 
Bound by the shackles of desires, many beings fall into the animal world and hell thousands of times, and then emerge from there again.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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