श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.279.18 
क्षपयित्वा तु तं कालं गणितं कालचोदिता:।
सावशेषेण कालेन सम्भवन्ति पुन: पुन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे अपने कर्मों के फल भोग में स्वर्ग या नरक में निश्चित समय व्यतीत करके शेष कर्मों के साथ काल के प्रभाव से इस संसार में बार-बार जन्म लेते हैं ॥18॥
 
In this manner, after spending a certain period of time in heaven or hell in the enjoyment of the fruits of their actions, they take birth again and again in this world with the influence of time along with the remaining karmas. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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