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mahabharat 12.279.11: जब जीव तत्वज्ञान के द्वारा अज्ञानजनित अंधकार को दूर कर देता है, तब उसके हृदय में सनातन ब्रह्म प्रकाशित हो जाता है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.279.11 
ज्ञानेन हि यदा जन्तुरज्ञानप्रभवं तम:।
व्यपोहति तदा ब्रह्म प्रकाशति सनातनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब जीव तत्वज्ञान के द्वारा अज्ञानजनित अंधकार को दूर कर देता है, तब उसके हृदय में सनातन ब्रह्म प्रकाशित हो जाता है ॥11॥
 
When a living being removes the darkness caused by ignorance through philosophical knowledge, then the eternal Brahma becomes illuminated in his heart. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)