श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.279.1 
युधिष्ठिर उवाच
धन्या धन्या इति जना: सर्वेऽस्मान् प्रवदन्त्युत।
न दु:खिततर: कश्चित् पुमानस्माभिरस्ति ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - पितामह ! सब लोग हमारी प्रशंसा करते हैं, परन्तु हमसे अधिक दुःखी कोई दूसरा नहीं है ॥1॥
 
Yudhishthira said - Grandfather! Everyone praises us but there is no other person who is more unhappy than us.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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