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श्लोक 12.279.1  |
युधिष्ठिर उवाच
धन्या धन्या इति जना: सर्वेऽस्मान् प्रवदन्त्युत।
न दु:खिततर: कश्चित् पुमानस्माभिरस्ति ह॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर बोले - पितामह ! सब लोग हमारी प्रशंसा करते हैं, परन्तु हमसे अधिक दुःखी कोई दूसरा नहीं है ॥1॥ |
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| Yudhishthira said - Grandfather! Everyone praises us but there is no other person who is more unhappy than us.॥ 1॥ |
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