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mahabharat 12.276.3: भीष्म बोले, "हे राजन! एक बार ऋषि माण्डव्य ने विदेह के राजा जनक से ऐसा ही प्रश्न पूछा था। इस प्रश्न के उत्तर में विदेह के राजा ने भी यही भावना व्यक्त की थी। विद्वान लोग ऐसे अवसरों पर यही प्राचीन कथा उदाहरण के रूप में दोहराते हैं।"   |   mahabharat अध्याय 12.276: तृष्णाके परित्यागके विषयमें माण्डव्य मुनि और जनकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 276: तृष्णाके परित्यागके विषयमें माण्डव्य मुनि और जनकका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.276.3 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
गीतं विदेहराजेन माण्डव्यायानुपृच्छते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! एक बार ऋषि माण्डव्य ने विदेह के राजा जनक से ऐसा ही प्रश्न पूछा था। इस प्रश्न के उत्तर में विदेह के राजा ने भी यही भावना व्यक्त की थी। विद्वान लोग ऐसे अवसरों पर यही प्राचीन कथा उदाहरण के रूप में दोहराते हैं।"
 
Bhishma said, 'O King! Once sage Mandavya had asked a similar question to King Janaka of Videhas. In reply to this question, the King of Videhas had expressed the same sentiments. The same ancient story is repeated by learned persons as an example on such occasions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)