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श्लोक 12.276.14  |
राज्ञस्तद् वचनं श्रुत्वा प्रीतिमानभवद् द्विज:।
पूजयित्वा च तद् वाक्यं माण्डव्यो मोक्षमाश्रित:॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| राजा के ये वचन सुनकर ब्रह्मर्षि माण्डव्य अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनके वचनों की सराहना करते हुए ऋषि ने मोक्ष मार्ग की शरण ली। |
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| Hearing these words of the king, Brahmarshi Mandavya became very pleased. Appreciating his words, the sage took refuge in the path of salvation. 14. |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि माण्डव्यजनकसंवादे षट्सप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें माण्डव्य और जनकका संवादविषयक दो सौ छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७६॥
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