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mahabharat 12.270.31: जिसका सुख संतोष पर आधारित है, जिसका स्वभाव त्याग है, जो ज्ञान का धाम कहा गया है, जिसमें मोक्ष देने वाली बुद्धि और ब्रह्म साक्षात्कार की वृत्ति सदैव आवश्यक है, वह संन्यास आश्रम रूपी धर्म शाश्वत है।   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.270.31 
संतोषमूलस्त्यागात्मा ज्ञानाधिष्ठानमुच्यते।
अपवर्गमतिर्नित्यो यतिधर्म: सनातन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जिसका सुख संतोष पर आधारित है, जिसका स्वभाव त्याग है, जो ज्ञान का धाम कहा गया है, जिसमें मोक्ष देने वाली बुद्धि और ब्रह्म साक्षात्कार की वृत्ति सदैव आवश्यक है, वह संन्यास आश्रम रूपी धर्म शाश्वत है।
 
The one whose happiness is based on contentment, whose nature is renunciation, who is called the abode of knowledge, in whom the salvation-giving intellect and the attitude of realization of Brahma is always essential, that religion in the form of Sannyasa Ashram is eternal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)