श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.269.58 
य: कश्चिन्न्याय्य आचार: सर्वं शास्त्रमिति श्रुति:।
यदन्याय्यमशास्त्रं तदित्येषा श्रूयते श्रुति:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जो कुछ न्यायोचित आचरण है, वह शास्त्रविहित है, ऐसा श्रुतिका का कथन है। जो कुछ अन्यायपूर्ण आचरण है, वह अशास्त्रविहित है, ऐसा भी श्रुति में सुना जाता है ॥58॥
 
Whatever is just conduct, it is scripture, such is the statement of the Shrutika. Whatever is unjust conduct, it is unscriptural, such is also heard in the Shruti. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)