एवं चतुर्णां वर्णानामाश्रमाणां प्रवृत्तिषु।
एकमालम्बमानानां निर्णये किं निरामयम्॥ ४८॥
अनुवाद
इस प्रकार चारों वर्णों और आश्रमों के लोग समस्त कार्यों में एक ही सुख का आश्रय लेते हैं और उसी को लक्ष्य मानकर आगे बढ़ते हैं। अतः अब आप मुझे यह बताइए कि शाश्वत सुख क्या है? ॥48॥
In this manner, people of all four castes and ashrams resort to only one happiness in all activities and move ahead with that as their goal. So, tell me, in principle, what is everlasting happiness? ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥