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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद
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श्लोक 47
श्लोक
12.269.47
भवन्तोऽपि च हृष्यन्ति शोचन्ति च यथा वयम्।
इन्द्रियार्थाश्च भवतां समाना: सर्वजन्तुषु॥ ४७॥
अनुवाद
तुम भी हमारी तरह हर्ष और शोक प्रकट करते हो। समस्त प्राणियों की तरह तुम भी शब्द, स्पर्श आदि का ग्रहण और अनुभव करते हो॥ 47॥
You too express joy and sorrow like we do. Like all living beings, you too receive and perceive sound, touch, etc.॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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